Bank Of Baroda- Rashtra Bhasha Samman- Bhaga Hua Ladka

‘घर पलानों छेले’ अर्थात् ‘भागा हुआ लड़का’ उपन्यास वर्ष 1953 में हुए देश में पूर्वी बंगाल के बँटवारे से जुड़ी एक दलित वर्ग के लड़के के जीवन जीने के संघर्षों की कहानी है । श्री मनोरंजन व्यापारी जी की लगभग सभी किताबें जाति, ऊंची जातियों और भेदभाव तथा सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा करती हैं । इस उपन्यास की अनुवादक सुश्री अमृता बेरा का मानना है कि अनुवाद ही वो माध्यम है जिससे हम दूसरी भाषा या समाज के बारे में जान और समझ सकते हैं ।
